अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस-विश्व मातृभाषा दिवस

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मातृभाषा क्या है?

मातृभाषा एक यौगिक शब्द है, जो मातृ+भाषा के योग से बना है, जहां मातृ शब्द का अर्थ माता और भाषा का अर्थ बोलना, बोली या भाषा है। इस प्रकार मातृभाषा का शाब्दिक अर्थ माँ की भाषा या बोली/माँ से प्राप्त भाषा या बोली से है। हरदेव बाहरी के अनुसार ”अपने घर में बोली जाने वाली भाषा मातृभाषा है”। भोलानाथ तिवारी के शब्दों में उदाहरण के तौर पर समझें तो भारत के हिन्दीभाषी क्षेत्र के लोगों के लिए राष्ट्रभाषा हिन्दी ही उनकी मातृभाषा है।

इस प्रकार किसी व्यक्ति या बच्चे के लिए मातृभाषा से तात्पर्य जन्म के साथ सीखने वाली भाषा से है, अर्थात् जन्म के पश्चात हम सबसे पहले जिस भाषा को सीखते हैं, जिसे पहली बार बोलते और जिसमें अपने घर-परिवार व क्षेत्र के लोगों से प्रायः बातचीत या व्यवहार करते हैं उसे मातृभाषा कहा जाता है। इस रूप में मातृभाषा हमारी सामाजिक, क्षेत्रगत व भाषाई पहचान होती है।

गांधी जी ने मैकॉले के औपनिवेशिक मानसिकता की भाषा नीति, ‘स्वराज’ प्राप्ति एवं राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए मातृभाषा पर सर्वाधिक ज़ोर देते हुए कहा था कि ”हजारों व्यक्तियों को अंग्रेज़ी सिखलाना उन्हें ग़ुलाम बनाना है।” इस रूप में उनका यह मानना था कि मातृभाषा का स्थान दूसरी भाषा नहीं ले सकती।”गाय का दूध भी माँ का दूध नहीं हो सकता।”

N.E.P. 2020 यानी नई शिक्षा नीति 2020 का भी यह मानना है कि मातृभाषा का प्रयोग करने वाले बच्चे और विद्यार्थी प्रायः मेधावी या प्रतिभावान होते हैं। अतः भारत में मातृभाषा के महत्व को आँकते हुए भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा को किसी भी हाल में मातृभाषा में देने का प्रावधान किया है।

मातृभाषा दिवस क्या है?

मातृभाषा दिवस यानी मातृभाषा का दिन। मातृभाषा दिवस यूनेस्को (UNESCO) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मातृभाषा को समर्पित एक दिन है, जो वैश्विक स्तर पर मातृभाषा के महत्व को स्थापित करता है।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस कब मनाया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फ़रवरी को वर्ष 2000 ई. से प्रतिवर्ष मनाया जाता है। हालांकि यूनेस्को ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की स्वीकृति 17 नवम्बर 1999 को दी थी किंतु मातृभाषा के लिए पूरी दुनिया में सर्वप्रथम 21 फरवरी 1952 को अपना बलिदान देने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के सम्मान में इसे 21 फरवरी को मनाया जाता है। बांग्लादेश में भी 21 फरवरी का दिन 1952 से ही ‘भाषा आंदोलन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। मातृभाषा के शहीदों के लिए वहाँ 21 फरवरी को एक दिन का राष्ट्रीय अवकाश भी घोषित किया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस क्यों मनाया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाये जाने का प्रमुख कारण बांग्लादेश के 1952 का ‘भाषा आंदोलन’ है। बांग्लादेश के इस भाषा आंदोलन की कहानी बड़ी दिलचस्प और अपनी भाषा के प्रति प्रेम का सबसे अपूर्व उदाहरण है।

1947 में भारत आज़ाद हुआ किंतु साथ ही उसका विभाजन भी हो गया। इस प्रकार जब 1947 में पाकिस्तान बना तो वह दो भागों में बँटा था, एक पूर्वी पाकिस्तान जिसे आज का पाकिस्तान या प्रमुख पाकिस्तान कहते हैं और दूसरा पश्चिमी पाकिस्तान या आज जिसे बांग्लादेश कहा जाता है। पाकिस्तान के इन दोनों हिस्सों की भाषाई विशेषता अलग थी, जहां पूर्वी पाकिस्तान उर्दू बहुल क्षेत्र था यानी वहाँ उर्दू का बोलबाला था तो वहीं पश्चिमी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में बांग्ला भाषा का प्रयोग अधिकतर किया जाता था। सरकार के तौर पर शासन की कमान पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के पाकिस्तान के हाथ में होने के कारण पाकिस्तानी सरकार ने बिना बांग्लादेशी क्षेत्र के लोगों की सहमति और निरंकुशता पूर्ण तरीक़े से उर्दू को पूरे पाकिस्तान अर्थात् पूर्वी और पश्चिमी दोनों क्षेत्र की राष्ट्रीय भाषा घोषित कर दिया।

पाकिस्तान सरकार के इस ज़बरदस्ती थोपे हुए फ़ैसले का पश्चिमी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में ज़बरदस्त विरोध होना शुरू हुआ। बांग्ला भाषा बहुल क्षेत्र होने के कारण पश्चिमी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश ने यह माँग शुरू की कि उर्दू के साथ-साथ बांग्ला को भी राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिया जाय।

इस माँग को सबसे पहले 23 फरवरी 1948 को धीरेंद्रनाथ दत्त ने उठाया था। धीरे-धीरे इस माँग ने आंदोलन का स्वरूप ले लिया, लेकिन पाकिस्तान सरकार ने माँग को मानने या उस पर विचार करने की जगह बर्बरतापूर्ण तरीक़े से इस आंदोलन को पुरज़ोर तौर पर कुचलने की कोशिश की, जिसका परिणाम यह हुआ कि 21 फरवरी 1952 को पाकिस्तान सरकार के निर्देश पर अपनी माँग के समर्थन में जुटी आंदोलन रैलियों पर गोलियाँ बरसायी गयीं। इस अमानवीय घटना में कई लोगों की मौत हुई, कई सौ व्यक्ति घायल हुए।

यह घटना वीभत्स होते हुए भी ऐतिहासिक तौर पर इस रूप में महत्वपूर्ण है कि इतिहास में पहली बार लोगों ने अपनी मातृभाषा के लिए जान गँवाई। इस बलिदानी घटना की याद में बांग्लादेश के ढाका मेडिकल कॉलेज कैम्पस में शहीद मीनार या शहीद स्मारक का निर्माण भी किया गया है।

यूनेस्को द्वारा इस भाषा आंदोलन में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने हेतु कनाडा निवासी रफीकुल इस्लाम नामक बांग्लादेशी के आवेदन पर 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गयी। यूनेस्को के आह्वान पर वर्ष 2000 से इसे प्रति वर्ष अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2023 की थीम/Theme क्या है?

पूरे वर्ष एक प्रमुख उद्देश्य की प्राप्ति के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अन्य अंतर्राष्ट्रीय दिवसों की तर्ज़ पर अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के थीम की घोषणा भी यूनेस्को द्वारा की जाती है।

वर्ष 2023 के लिए अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की थीम ” बहुभाषी शिक्षा: शिक्षा को बदलने की आवश्यकता” रखा गया है।

मातृभाषा दिवस संबंधी अन्य महत्वपूर्ण तथ्य-

वर्ष 2005 में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर यूनेस्को ने ब्रेल तथा अन्य भाषाओं में साइन इन करने का सभी से अनुरोध किया था।

वर्ष 2008 को यूनेस्को ने ”अंतर्राष्ट्रीय भाषा वर्ष घोषित किया था।”

वर्ष 2012 में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर यूनेस्को द्वारा ”मातृभाषा शिक्षा और समावेशी शिक्षा” हेतु निर्देश दिया गया।

वर्ष 2013 में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर यूनेस्को ने ” मातृभाषा में शिक्षा के लिए पुस्तकें” नामक अभियान चलाया।

वर्ष 2018 के अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की थीम- ”हमारी भाषा ही हमारी संपत्ति ” रखा गया।

वर्ष 2019 को ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ द्वारा ”स्वदेशी भाषाओं का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष ” घोषित किया गया।

लेखक-

डॉ. ऋषिकेश सिंह

मातृभाषा किसे कहते हैं?

जन्म के पश्चात हम सबसे पहले जिस भाषा को सीखते हैं, जिसे पहली बार बोलते और जिसमें अपने घर-परिवार व क्षेत्र के लोगों से प्रायः बातचीत करते हैं उसे मातृभाषा कहा जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस किस दिन मनाया जाता है?

21 फरवरी।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस कब से मनाया जा रहा है?

सन् 2000 से।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पहली बार कब मनाया गया?

21 फरवरी 2000 को।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस किसके द्वारा घोषित किया गया था?

यूनेस्को

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का उद्देश्य क्या है?

इस दिन को मनाने का उद्देश्य विश्वभर की भाषाओं एवं संस्कृतियों का सम्मान एवं सुरक्षा करना है। इसके साथ ही दुनियाभर में भाषायी और सांस्कृतिक विविधता का प्रचार-प्रसार करना एवं विभिन्न मातृभाषाओं के बारे में लोगों को जागरूक करना है।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2023 का थीम-Theme क्या है?

बहुभाषी शिक्षा: शिक्षा को बदलने की आवश्यकता

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