Shishupalvadh Mahakavya – शिशुपालवधम् महाकाव्य एक दृष्टि में

Shishupalvadh Mahakavya – शिशुपालवधम् महाकाव्य एक दृष्टि में। इस महाकाव्य के रचनाकर महाकवि माघ हैं। इनका शिशुपालवध नामक महाकाव्य भारवि की परंपरा में विकसित हुआ है। महाकवि माघ के संबंध में एक प्रसिद्ध कथन है – ‘माघे सन्ति त्रयो गुणा:’। परीक्षा की दृष्टि से यह महाकाव्य और इस महाकाव्य के रचयिता दोनों महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। इन दोनों से जुड़ीं

महत्वपूर्ण बातें यहाँ उद्धृत हैं –

रचनाकार महाकवि माघ
उपनामघण्टामाघ
पिता का नाम दत्तक सर्वाश्रय
पितामह सुप्रभदेव
जन्मकाल की स्थिति 675 ई. के आस-पास
र्गों की संख्या20 सर्ग
श्लोकों की संख्या1650 श्लोक
काव्य का प्रकारमहाकाव्य (वृहत्त्रयी के अंतर्गत गिना जाता है।)
नायक श्रीकृष्ण
प्रतिनायक चेदि नरेश शिशुपाल
दूसरे प्रमुख पात्रनारद, बलराम, उद्धव, सात्यकि, भीष्म इत्यादि
उपजीव्य श्रीमद् भागवत के दशवें स्कन्ध में 74 वाँ अध्याय तथा महाभारत सभा पर्व
(अध्याय 33 – 45 तक)
रस अंगीरस, वीर तथा शृंगार, हास्य आदि अंग रस
शैलीअलंकारवादी
गुण ओज और माधुर्य गुणों की अधिकता
भाषापरिष्कृत, लालित्यपूर्ण एवं प्रवाहमयी
प्रयुक्त अलंकारउपमा, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, अर्थान्तरन्यास तथा चित्रालंकारों की अधिकता
प्रयुक्त छन्द वंशस्थ, अनुष्टुप, उपजाति, वसंततिलका, आदि 22 छंदों का प्रयोग
प्रयुक्त अलंकार द्वारका व समुद्र वर्णन, रैवतक पर्वत वर्णन, षड् ऋतुओं का वर्णन, जलक्रीड़ा वर्णन,
प्रभात वर्णन, पानगोष्ठी एवं सभा वर्णन प्रमुख हैं।
मंगलाचरण महाकाय का आरम्भ ‘श्री’ शब्द से होता है।
शास्त्रीय पांडित्यमाघ ने वेद, व्याकरण दर्शन, काव्यशास्त्र, राजनीति, आयुर्वेद, नीतिशास्त्र,
संगीत इत्यादि में विशेष रूप से दक्ष
माघ की न्यूनताएं (1) कथानक महाकाव्य की रचना के लिए पर्याप्त नहिं कहा जा सकता।
(2) कथा के प्रभाव में अभाव है।
(3) सूरत आदि के वर्णन जरूरत से ज्यादा और अंशों में तो अनौचित्यपूर्ण लगता है।
(4) पांडित्य प्रदर्शन वाले स्थान नीरस और दुरूह हो गए हैं।
प्रमुख सूक्तियाँ (1) किमस्ति कार्यं गुरुयोगिनामपि।
(2) अथवा श्रेयसि केन तृप्यते।
(3) महियांस: प्रकृत्या मितभाषिण:।
(4) पादाहतं यदुत्थाय मूर्धानमतिरोहति।
(5) परिभाषेव गरीयसी यदाज्ञा।
(6) पूर्वरंग प्रसंगाय नाटकीयस्य वस्तुन:।

शिशुपालवधम् महाकाव्य का नायक कौन है?

Ans. श्रीकृष्ण।

महाकवि माघ का उपनाम क्या है?

Ans. घण्टामाघ है।

शिशुपालवधम् महाकाव्य में कुल कितने सर्ग हैं?

Ans. 20 सर्ग हैं।

महाकवि माघ के पिता का क्या नाम है?

Ans. दत्तक सर्वाश्रय है।

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