Pratyay Kya Hai – प्रत्यय क्या है?

जो शब्दांश मूल शब्दों के आखिर में लगकर उनके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता ला-देते हैं, वे प्रत्यय कहलाते हैं।

यथा-दूध-दूधवाला, पंजाब-पंजाबी

उपरोक्त मूल शब्द दूध और पंजाब के पीछे वाला तथा ई शब्दांशो के जुड़ने से मूल शब्दों में परिवर्तन आ गया है और दूधवाला तथा पंजाबी नए शब्द बन गए हैं। मूल शब्दों के पीछे लगकर उनके अर्थ परिवर्तन ला देने वाले ये शब्दांश प्रत्यय कहलाते हैं।

प्रत्यय के भेद :-

(1) संज्ञा के अंत में लगने वाले प्रत्यय

(2) धातु के अंत में लगने वाले प्रत्यय

(1) संज्ञा के अंत में लगने वाले प्रत्यय :-

(क) पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने वाले प्रत्यय-

आ – बाल से बाला, नी – ऊंट से ऊंटनी,

प्रिय से प्रिया, मोर से मोरनी,

सुत से सुता, शेर से शेरनी,

ई – रस्सा से रस्सी, इया – डिब्बा से डिबिया,

बेटा से बेटी, कुत्ता से कुतिया,

हिरन से हिरनी, चूहा से चुहिया,

आनी – इंद्र से इंद्राणी, आइन – बाबू से बाबुआइन,

नौकर से नौकरानी, पंडित से पंडिताइन,

भव से भवानी, बाबू से बबुआइन,

(ख) भाववाचक संज्ञा बनाने वाले प्रत्यय-

त्व – पशु से पशुत्व, आपा – बूढ़ा से बुढ़ापा,

देव से देवत्व, पूजा से पुजापा

नर से नरत्व,

ता – सुंदर से सुंदरता, आहट – कड़वा से कड़वाहट,

लघु से लघुता, चिकना से चिकनाहट,

आई – चौड़ा से चौड़ाई, पन – बालक से बालकपन,

लंबा से लंबाई, लड़का से लड़कपन,

(ग) विशेषण बनाने वाले प्रत्यय-

ई – लोभ से लोभी, ईन – ग्राम से ग्रामीण,

क्रोध से क्रोधी, कुल से कुलीन,

इक – धर्म से धार्मिक, मान – श्री से श्रीमान,

दिन से दैनिक, गति से गतिमान,

इत – क्रोध से क्रोधित, वान – बल से बलवान,

आनंद से आनंदित, गुण से गुणवान,

ईय – भारत से भारतीय, आ – भूख से भूखा,

दर्शन से दर्शनीय, प्यास से प्यासा,

(घ) क्रिया विशेषण बनाने वाले प्रत्यय-

पूर्वक – दया से दयापूर्वक, तया – पूर्ण से पूर्णतया,

न्याय से न्यायपूर्वक, विशेष से विशेषतया,

(ङ) किसी कार्य के करने वाले का बोध कराने वाला प्रत्यय-

आर – लोहा से लोहार, कर – साहित्य से साहित्यकार,

सोना से सुनार, कला से कलाकार,

वाला – फल से फलवाला, गर – बाजी से बाजीगर,

फूल से फूलवाला, सौदा से सौदागर,

(च) संबंध का बोध करने वाला प्रत्यय-

एरा – मामा से ममेरा, चाचा से चचेरा,

(छ) स्थान का बोध कराने वाले प्रत्यय-

ई – बंगाल से बंगाली, वाला – मेरठ से मेरठ वाला,

बिहार से बिहारी, दिल्ली से दिल्लीवाला,

(ज) संख्या का बोध कराने वाला-

हरा – दो से दोहरा/दुहरा, वाँ – पाँच से पाँचवाँ,

एक से इकहरा, आठ से आठवाँ,

(झ) वचन का बोध कराने वाला प्रत्यय-

ए – घोड़ा से घोड़े, एँ – माला से मलाएँ,

घड़ा से घड़े, कन्या से कन्याएँ,

(2) धातु के अंत में लगने वाले प्रत्यय :-

वाला – पढ़ से पढ़ने वाला, आहट – घबरा से घबराहट,

लिख से लिखने वाला, गुर्रा से गुर्राहट,

आवट – बना से बनावट, ना – चल से चलना,

सजा से सजावट, खा से खाना,

आव – बच से बचाव, अक्कड़ – पी से पियक्कड़,

बन से बनावट, भूल से भुलक्कड़,

अन – खा से खान, आई – लड़ से लड़ाई,

चल से चलना, पढ़ से पढ़ाई,

झाड़ से झाड़न, लेख से लिखाई।

प्रत्यय किसे कहते हैं?

Ans. जो शब्दांश मूल शब्दों के आखिर में लगकर उनके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता ला देते हैं,वे प्रत्यय कहलाते हैं।

प्रत्यय कितने प्रकार के होते हैं?

Ans. दो प्रकार के

निम्नलिखित शब्दों में प्रत्यय जोड़कर नए शब्दों का निर्माण कीजिए।

Ans. (1) पढ़ – पढ़ने वाला, (2) चिकना – चिकनाहट, (3) पंजाब – पंजाबी।

निम्नलिखित शब्दों में से मूल शब्द और प्रत्यय अलग कीजिए।

Ans. शक्तिशाली – शक्ति (मूल शब्द), शाली (प्रत्यय), नौकरानी – नौक (मूल शब्द), रानी (प्रत्यय)।

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