Naishdhiyachritam Mahakavya – नैषधीयचरितम् महाकाव्य एक दृष्टि में-

इस महाकाव्य के रचनाकार महाकवि श्रीहर्ष हैं। यह कृति और कृतिकार परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण हैं –

रचनाकारमहाकवि श्रीहर्ष
पिता श्रीहरि
मातामामल्ल देवी
समय12 वीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध (लगभग 1175 ई.)
आश्रयदाताकन्नौज के राजा जयचंद्र
उपजीव्यमहाभारत के वन पर्व का नलोपाख्यान
प्रयुक्त सर्ग कुल 22 सर्ग
प्रयुक्त श्लोक2830 श्लोक
प्रयुक्त छंदकुल 19 छंद, सर्वाधिक प्रिय छंद उपजाति
प्रयुक्त अलंकारशृंगार अंगीरस। भयानक, रौद्ररस का प्रयोग बिल्कुल नहीं।
नायकनिषध देश का नायक – नल
नायिका विदर्भ की राजकुमारी – दमयन्ती
प्रयुक्त शैली एवं गुणवैदर्भी शैली किन्तु प्रसाद गुण का अभाव पाया जाता है।
काव्य का प्रकारमहाकाव्य (वृत्त्रयी में स्थान)
पंचनली चारों देवता – इन्द्र, अग्नि, वरुण, यम। तथा नल।
प्रमुख सूक्तियां(1) आर्जवं हि कुटिलेषु न नीतिः।
(2) जनानने कः करमर्पयिष्यति।
(3) मितं च सारं च वचोहि वाग्मिता।
(4) कर्म कः स्वकृतमत्र न भुङक्ते।
(5) दुर्जया हि विषया विदुषाडपि।

नैषधीयचरितम् का नायक कौन है?

Ans. निषध देश का नायक नल।

नैषधीयचरितम् की नायिका कौन है?

Ans. विदर्भ की राजकुमारी दमयन्ती।

नैषधीयचरितम् में कुल कितने सर्ग हैं?

Ans. कुल 22 सर्ग हैं।

महाकवि श्रीहर्ष किस राजा के आश्रयदाता थे?

Ans. कन्नौज के राजा जयचंद्र के।

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