Meghdut Mhaakaavya by Kalidas- मेघदूतम् महाकाव्य एक दृष्टि में

मेघदूत महाकाव्य कालिदास की उत्कृष्ट कृतियों में से एक है। इस महाकाव्य के कवि (कालिदास) की यहां प्रौढ़ कल्पना, उदात्त भावना परिष्कृत शैली व कोमलकांत पदावली का सामंजस्य दिखाई देना स्वाभाविक है। परीक्षा की दृष्टि से यह कृति एवं कृतिकार दोनों महत्त्वपूर्ण हैं -जिससे संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ यहाँ दी गयी हैं जो आगामी परीक्षाओं की दृष्टि से बहुत उपयोगी हैं –

मेघदूतम् महाकाव्य से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

रचयितामहाकवि कालिदास
उपजीव्यरामायण
मुख्य कथनउत्कंठित हृदय की वियोग दशा का चित्रण
खण्ड(2) पूर्व मेघ एवं उत्तर मेघ
(1) पूर्व मेघ में –रामगिरि से लेकर अलकापुरी तक के मार्ग का वर्णन
(2) उत्तर मेघ में –प्रिया के लिए संदेश प्रेषण
नायककिंकर यक्ष
नायिकायक्षिणी
प्रयुक्त छंदमन्दाक्रान्ता
प्रयुक्त रसविप्रलंभ शृंगार
शैलीवैदर्भी रीति, प्रसाद गुण
श्लोकों की संख्यापूर्व मेघ में 63 + उत्तर मेघ 52 = 115
टीकाएं50 से अधिक टीकाएं लिखी जा चुकी हैं, जिनमें से मल्लिनाथ की टीका सर्वश्रेष्ठ
मानी जाती है।
प्रयुक्त प्रमुख सूक्तियाँ(1) मेघालेके भवति सुखिनोडप्यन्यथा वृत्ति चेत:।
(2) कामार्त्ता हि प्रकृति कृपणाश्चेनानेतनेषु।
(3) रिक्त: सर्वो भवति हि लघु: पूर्णता गौरवाय।
(4) ज्ञातास्वादो विवृतजघानां को विहातुं समर्थ:।
(5) सूर्यापाये न खलु कमलं पुष्यति स्वामभिख्याम्।
(6) प्रायः सर्वो भवति करुणावृत्तिरार्द्रान्तरात्मा।

मेघदूत खंडकाव्य किसने लिखा है ?

Ans. महाकवि कालिदास ने।

मेघदूत खंडकाव्य का नायक कौन है ?

Ans. किंकर यक्ष है।

मेघदूत खंडकाव्य किस छन्द में लिखा गया है ?

Ans. मन्दाक्रान्ता छन्द में लिखा गया है।

मेघदूत खंडकाव्य किस रस में लिखा गया है ?

Ans. विप्रलंभ शृंगार में लिखा गया है।

मेघदूत खंडकाव्य की नायिका कौन है?

Ans. यक्षिणी है।

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