Kiratarjuniyam Mahakavaya – किरातार्जुनीयम् महाकाव्य एक दृष्टि में –

किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के रचयिता महाकवि भारवि हैं। ये संस्कृत साहित्य में अर्थ गौरव के लिए प्रसिद्ध हैं। ‘भारवे अर्थगौरवम्’ अर्थात् थोड़े से शब्दों में बड़ी बातों को समेट लेना अर्थ गौरव की पहचान है।

परीक्षा की दृष्टि से यह इस महाकाव्य का संक्षिप्त परिचय बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। उत्तर प्रदेश की टीजीटी तथा पीजीटी हिन्दी की परीक्षा में संस्कृत के प्रश्न इसी तरह के पाठ्यक्रम से पूछे जाते हैं।

रचनाकारभारवि
उपनाम आतपत्र भारवि
काल 600 ई. के आस-पास
काव्य का प्रकारमहाकाव्य, वृहत्त्रयी में महत्वपूर्ण (वृहत्त्रयी – किरातार्जुनीयम + शिशुपालवधम् + नैषधचरितम्)
उपजीव्यमहाभारत का वन पर्व
सर्ग 18
श्लोकों की संख्या1030 श्लोक
छन्दकुल 25 छन्द, वंशस्थ और मालिनी का प्रयोग ज्यादा।
प्रयुक्त प्रधान रस वीर रस, शृंगार गौण रस ।
प्रयुक्त रीति गुणपांचाली रीति, प्रसाद गुण
नायक अर्जुन
प्रतिनायक किराताधिपति शिव
नायिकाद्रोपदी
प्रयुक्त अलंकार 3 शब्दालंकार, 60 अर्थालंकार एवं 7 चित्राअक्षर
प्रमुख सूक्तियाँ (1) हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:।
(2) सुदुर्लभा सर्व मनोरथा गिर: ।
(3) गुरुतां नयन्ति हि गुणा न संहति:।
(4) वरं विरोधोडपि समं महात्मभि:।
(5) सतां हि वाणी गुणमेव भाषते।
(6) भवन्ति भव्येषु हि पक्षपाता:।
(7) व्रजन्ति ये मूढ़धिय: पराभवं भवन्ति मायाविषु ये न मायिन:।

किरातार्जुनीयम् महाकाव्य का रचनाकार कौन है?

Ans. महाकवि भारवि।

किरातार्जुनीयम् महाकाव्य में कुल कितने सर्ग हैं?

Ans. 18 सर्ग।

किरातार्जुनीयम् महाकाव्य की नायिका कौन है?

Ans. द्रोपदी।

किरतार्जुनीयम् महाकाव्य में श्लोकों की संख्या कितनी है?

Ans. 1030 श्लोक।

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