Kavyashastra Question Answer – 4 – काव्यशास्त्र प्रश्न उत्तर

1. छंदशास्त्र के आदिआचार्य है- 

(A) पिंगल 

(B) मम्मट 

(C) भरत 

(D) भामाह 

उत्तर (A) 

2. ‘छंदसूत्र’ के रचयिता हैं- 

(A) वाल्मीकि 

(B) कुंतक 

(C) पिंगल 

(D) दण्डी 

उत्तर (C) 

3. लौकिक संस्कृत छंदों का जन्मदाता किसे माना गया है? 

(A) पिंगल 

(B) भामाह 

(C) वाल्मीकि 

(D) भरत 

उत्तर (C) 

4. हिन्दी साहित्य में छंदशास्त्र की दृष्टि से पहली कृति कौन है ? 

(A) छंदोर्णव 

(B) छंदसार 

(C) छंदविचार 

(D) छंदमाला 

उत्तर (D) 

5. ‘छंदमाला’ के रचयिता हैं- 

(A) केशवदास 

(B) देव कवि 

(C) मतिराम 

(D) भिखारीदास 

उत्तर (A) 

6.छंद पढ़ते समय आने वाले विराम को क्या कहते हैं? 

(A) गति 

(B) यति 

(C) तुक 

(D) गण 

उत्तर (B) 

7. छंद पढ़ते समय मात्राओं के लघु अथवा दीर्घ होने के कारण जो विशेष स्वर लहरी उत्पन्न होती है, उसे क्या कहते हैं? 

(A) गण 

(B) गति 

(C) तुक 

(D) यति 

उत्तर (C) 

8. ‘छंद प्रभाकर’ के रचयिता हैं- 

(A) जगन्नाथ प्रसाद ‘भानु’ 

(B) मतिराम 

(C) भिखारीदास 

(D) कुलपति मिश्र 

उत्तर (A) 

9. गणों की सही संख्या है- 

(A) चार 

(B) आठ 

(C) छः 

(D) दस 

उत्तर (B) 

10. प्रत्येक गण में कितने वर्ण होते हैं? 

(A) दो 

(B) तीन 

(C) चार 

(D) छ: 

उत्तर (B) 

11. दोहा और सोरठा किस प्रकार के छंद हैं? 

(A) समवर्णिक 

(B) सममात्रिक 

(C) अर्द्धसममात्रिक 

(D) विषममात्रिक 

उत्तर (C) 

12. दोहा और रोला के संयोग से कौनसा छंद बनता है? 

(A) बरवै 

(B) छप्पय 

(C) रोला 

(D) कुण्डलिया 

उत्तर (D) 

निर्देश—(प्रश्न 13 से 42 तक) प्रत्येक प्रश्न में काव्यांश दिया गया है, प्रत्येक काव्यांश में प्रयुक्त छंद के चार विकल्प दिए गए हैं, जिनमें एक ही सही है. आपको सही विकल्प का चयन करना है. 

13. होता उन्हें केवल धर्म प्यारा, 

   सत्कर्म ही जीवन का सहारा । 

   सत्याश्रयी साधु फकीर होते, 

   संताप से धैर्य कभी न खोते ।। 

(A) इन्द्रवज्रा 

(B) वसंतलतिका  

(C) उपेन्द्रवज्रा 

(D) वंशस्थ 

उत्तर (A) 

14. पखारते हैं पद्म कोई, 

   चढ़ा रहे हैं फल पुष्प कोई । 

   करा रहे हैं पयपान कोई, 

   उतारते श्रीधर आरती हैं। 

(B) उपेन्द्रवज्रा 

(D) वसंततिलका 

(C) इंद्रवज्रा 

(D) मंदाक्रांता 

उत्तर (B) 

15. बातें बड़ी मधुर औ अति ही मनोज्ञा, 

   नाना मनोरम रहस्यमयी अनूठी । 

   जो हैं प्रसूत भवदीय मुखाब्ज द्वारा, 

   हैं वांछनीय यह सर्व सुखेच्छकों को ।। 

(A) इन्द्रवज्रा 

(B) वसंततिलका 

(C) उपेन्द्रवज्रा 

(D) शिखरिणी 

उत्तर (B) 

16. मिले बड़े भाग्य अहो मनुष्यता, 

   मनुष्यता में शुचि शास्त्र योग्यता । 

   सुयोग्यता में प्रिय काव्य कारिता, 

   सुकारिता में अति शक्ति साध्यता । 

(A) सवैया 

(B) मालिनी 

(C) उपेन्द्रवज्रा 

(D) वंशस्थ 

उत्तर (D) 

17. मैं नारी हूँ तरल उर हूँ, प्यार से वंचिता हूँ। 

   मैं होती हूँ विकल विमना, व्यस्त वैचित्र्य क्या है ।। 

(A) मंदाक्रांता 

(B) उल्लाला 

(C) वसंततिलका 

(D) इन्द्रवज्रा 

उत्तर (A) 

18. हनुमंत बली तुम जाहु तहाँ, 

  मुनि वेष भरत्थ बसंत जहाँ । 

  ऋषि के हम भोजन आजु करें, 

  पुनि प्रात भत्थहिं अंक भरैं । 

(A) तोटक 

(B) बरवै 

(C) वंशस्थ 

(D) भुजंगी 

उत्तर (A) 

19. नहीं लालसा है विभोवित्त की । 

   हमें चाहिए चेतना चित्त की । 

(A) सोरठा 

(B) दोहा 

(C) भुजंगी 

(D) रोला 

उत्तर (C)  

20. भारत भू की पुण्य धरा है। 

गौरव से आकाश भरा है। 

(A) गीतिका 

(B) चम्पकमाला 

(C) तोटक 

(D) बरवै 

उत्तर (B) 

21. जब विरह विधाता ने सृजा विश्व में था, 

   तब स्मृति रचने में कौनसी चातुरी थी? 

(A) वंशस्थ 

(B) शिखरिणी 

(C) तोटक 

(D) मालिनी 

उत्तर (D) 

22. सिंधु तरौ उनको वनरा, 

   तुम पै धनु रेख गई न तरी । 

   वानर बाँधत सो न बंध्यो, 

   उन वारिधि बाँधि कै बाट करी । 

(A) मदिरा 

(B) दुर्मिल 

(C) माधवी 

(D) मालिनी 

उत्तर (A) 

23. ‘कहो कहाँ हैं अब वे धनेश’- 

(A) इन्द्रवज्रा 

(B) मंदाक्रांता 

(C) उपेन्द्रवज्रा 

(D) शिखरिणी 

उत्तर (C) 

24. ‘विलसित उर में है, जो सदा देखता सा’- 

(A) शालिनी 

(B) मालिनी 

(C) शार्दुलविक्रीडति 

(D) सुंदरी 

उत्तर (B) 

25. दिवस का अवसान समीप था, 

   गगन था कुछ लोहित हो चला । 

   तरु शिखा पर थी अब राजती, 

   कमलिनी कुल वल्लभ की प्रभा ।। 

(A) मंदाक्रांता 

(B) वसंततिलका 

(C) शिखरिणी 

(D) द्रुतविलम्बित 

उत्तर (D) 

26. तारे डूबे तम टल गया, छा गई व्योम लाली । 

   पक्षी बोले तमचुर जगे, ज्योति फैली दिश में ।। 

(A) मंदाक्रांता 

(B) शिखरिणी 

(C) उपेन्द्रवज्रा 

(D) इन्द्रवज्रा 

उत्तर (A) 

27. निराले फूलों की, विविध दलवाली अनुपमा ।

जड़ी-बूटी ही हो, बहुफलवती श्री विलासती ।। 

(A) मंदाक्रांता 

(B) शिखरिणी 

(C) छप्पय 

(D) उल्लाला 

उत्तर (B) 

28. ज्ञाता हैं कहते मनुष्य वश में है काल कर्मादि के। 

   होती है घटना-प्रवाह-पपिता-स्वधीनता पंत्रिता ॥ 

(A) मालिनी 

(B) शार्दुलविक्रीडित 

(C) दुर्मिल  

(D) मालिनी 

उत्तर (B) 

29. को नहिं जानत है जग में, 

   कपि संकट मोचन नाम तिहारो। 

(A) पीयूषवर्ष 

(B) मत्तगयंद 

(C) गीतिका 

(D) रूपमाला 

उत्तर (B) 

30. कबहुँ ससि माँगत आरि कै, कबहुँ प्रतिबिंब निहारि डरैं। 

(A) दुर्मिल 

(C) गीतिका 

(B) मालिनी 

(D) शिखरिणी 

उत्तर (A) 

31. लज्जा की लाली फैली थी, भौंहें तनिक चढ़ी थीं । 

   ग्रीवा नीची थी पर आँखें, नृप की ओर बढ़ी थीं ।। 

(A) मालिनी 

(B) लावनी 

(C) सार 

(D) तोटक 

उत्तर (C) 

32. आनंद हमारे ही अधीन रहता है । 

   फिर भी विषाद नर-लोक व्यर्थ सहता है।। 

(A) पंचचामर 

(C) राधिका 

(B) चम्पकमाला 

(D) चौपाई 

उत्तर (C) 

33. प्रीति-रीति को बिरवा, चले लगाइ । 

सींचन की सुधि लीजो, मुरझिन जाइ ।। 

(A) रोला 

(B) चौपाई 

(C) दोहा 

(D) बरवै 

उत्तर (D) 

34. हे शरण दायिनी देवि तू, करती सबका भाण है। 

   हे मातृभूमि संतान हम, तू जननी तू प्राण प्राण है ।। 

(A) दोहा 

(B) छप्पय 

(C) उल्लाला 

(D) बरवै 

उत्तर (C) 

35. कहते हुए यों उत्तरा के नेत्रजल से भर गए। 

   हिम के कणों से पूर्ण मानों, हो गए पंकज नए ।। 

(A) हरिगीतिका 

(B) सरसी 

(C) चतुष्पदी 

(D) रूपमाला 

उत्तर (A) 

36. हम खेले कूदे हर्ष युत, जिसकी प्यारी गोद में। 

   हे मातृभूमि तुझको निरख, मग्न क्यों न हो मोद में? 

(A) लावनी 

(B) छप्पय 

(C) सुंदरी 

(D) पीयूषवर्ष 

उत्तर (B) 

37. कहुँ देखियत कहुँ नाहिं, बधू बन बीच बनी यों । 

  बिजरिन से दो टूक सघन वन, माँझ चलत ज्यों ।। 

(A) रोला 

(B) दोहा 

(C) सोरठा 

(D) छप्पय 

उत्तर (A) 

38. कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि । 

   कहत लखन सन राम हृदय गुनि ॥ 

(A) राधिका 

(B) छप्पय 

(C) चौपाई 

(D) सवैया 

उत्तर (C) 

39. श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन, सहज सुन्दर सांवरो । 

   करुणानिधान सुजान सीलु, सनेह जानत रावरो ॥ 

(A) उल्लाला 

(B) सरसी 

(C) रूपमाला 

(D) हरिगीतिका 

उत्तर (D) 

40. भए प्रकट कृपाला दीनदयाला, कौशल्या हितकारी । 

   हरषित महतारी मुनिमन हारी, अद्भुत रूप निहारी ॥ 

(A) पंचचामर 

(B) प्रतिमाक्षरा 

(C) चतुष्पदी 

(D) प्रमाणिका 

उत्तर (C) 

41. बंदऊँ गुरु पद कंज, कृपा सिंधु नर रूप हरि । 

   महामोह तम पुंज, जासु वचन रविकर निकर || 

(A) सोरठा 

(B) दोहा 

(C) रोला 

(D) बरवै 

उत्तर (A) 

42. भरतहि होइ न राजमद, विधि हरिहर पद पाइ । 

   कबहुँकि कांजी सीकरनि, छीर सिंधु बिनसाइ ।। 

(A) सोरठा 

(B) दोहा 

(C) बरवै 

(D) रोला 

उत्तर (B)  

43. ‘छप्पय’ के प्रथम चार चरण किस छंद के होते हैं? 

(A) उल्लाला 

(B) बरवै 

(C) रोला 

(D) दोहा 

उत्तर (C) 

44. ‘छप्पय’ के अन्तिम दो चरण किस छंद के होते हैं? 

(A) बरवै 

(B) दोहा 

(C) सोरठा 

(D) उल्लाला 

उत्तर (D)  

45. दोहा के प्रथम व तृतीय चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं? 

(A) तेरह-तेरह 

(B) बारह-बारह 

(C) ग्यारह-ग्यारह 

(D) चौदह-चौदह 

उत्तर (A) 

46. ‘वृत्त रत्नाकर’ के रचनाकार हैं- 

(A) हेमचंद्र 

(B) क्षेमेन्द्र 

(C) भट्ट केदार 

(D) पिंगलाचार्य 

उत्तर (C) 

47. कुण्डलिया के प्रत्येक चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं? 

(A) बीस 

(B) छब्बीस 

(C) दस 

(D) चौबीस 

उत्तर (D) 

48. छंदशास्त्र ग्रंथ ‘सुवृत्त तिलक’ के रचयिता कौन हैं? 

(A) भामाह 

(B) दण्डी 

(C) रुद्रट 

(D) क्षेमेन्द्र 

उत्तर (D) 

49. छंदानुशासन के रचयिता कौन हैं? 

(A) हेमचंद्र 

(B) सायण 

(C) भट्ट केदार 

(D) क्षेमेन्द्र 

उत्तर (A) 

50. हिन्दी में छंदशास्त्र का सर्वाधिक विस्तृत विवेचन किस ग्रंथ में हुआ था ? 

(A) मतिराम कृत छंदसार में 

(B) भिखारीदास कृत छंदोर्णवपिंगल में 

(C) देव कृत शब्द रसायन में 

(D) चिंतामणि कृत रस विलास में 

उत्तर (B)

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