Hindi ki Boliyan-हिंदी की बोलियाँ, उपभाषा, और अपभ्रंश

Hindi ki Boliyan-हिंदी की बोलियाँ कौन -कौन सी हैं और इनको किन-किन क्षेत्रों में बोला जाता है। इस पोस्ट में भाषा विज्ञान के अन्तर्गत आने वाली बोली और उपभाषा की बात करेंगे।

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बोली किसे कहते हैं?

बोली एक स्त्रीलिंग शब्द है। बोली, ‘बोल’ नामक शब्द में ‘ई’ प्रत्यय के मिलने से बना है। बोली का शाब्दिक अर्थ हरदेव बाहरी के अनुसार बोल, वचन, बोलचाल आदि है। वस्तुतः बोली एक ‘अनेकार्थी शब्द’ भी है जिसके अन्य अर्थ नीलामी की बोली, कटाक्ष, व्यंग्य, आदि भी हैं। भाषा-विज्ञान के क्षेत्र में बोली से तात्पर्य क्षेत्र विशेष में बोले जाने वाली वह भाषिक रूप है जिसमें कुछ साहित्यिक कार्य भी उपलब्ध हों। अंग्रेजी में बोली के लिए ‘Sub-Dialect’ शब्द प्रचलित है।

भोलानाथ तिवारी- ” बहुत सी मिलती-जुलती उपबोलियों का सामूहिक रूप बोली है।”

कपिलदेव द्विवेदी- ”जो भाषाएँ प्रांतीय स्तर पर स्वीकृत न होकर मंडलीय स्तर पर स्वीकृत रहती हैं तथा जिनमें साहित्यिक रचनाएँ भी विद्यमान रहतीं हैं। उन भाषाओं को बोली की श्रेणी में लिया जाना उचित है।”

भाषा और बोली में अंतर

भाषा मूलतः बोली की वृहद् या बड़ी इकाई है। इस रूप में भाषा को बोलियों का समूह या समुच्चय भी कहा गया गया है। इनमें सबसे बड़ा अंतर क्षेत्रीय विस्तार का है, जहां भाषा का क्षेत्रीय विस्तार राज्य या राष्ट्र स्तरीय होता है, वहीं बोली का विस्तार प्रांत या मण्डल स्तरीय माना जाता है। इसके साथ ही दोनों में साहित्यिक कार्य उपलब्ध होने के कारण स्वरूप में समानता भी है या दूसरे शब्दों में कहा जाय तो बोली, भाषा का वह निम्नतम रूप है जिसमें साहित्यिक लेखन का कार्य मिलता है।

भाषा का क्षेत्र अपेक्षाकृत बड़ा होता है, तथा बोली का क्षेत्र छोटा होता है।

एक भाषा की एक या अधिक बोलियाँ हो सकती हैं परंतु किसी बोली में एक या अधिक भाषाएँ नहीं हो सकती।

भोलानाथ तिवारी- ” बोली किसी भाषा से ही उत्पन्न होती है। इस प्रकार भाषा बोली में माँ-बेटी का संबंध है।”

उपभाषा किसे कहते हैं?

उपभाषा, भाषा और बोली के मध्य की भाषिक स्थिति है। इसे अंग्रेज़ी में ‘Sub-Language’ या ‘Dialect’ भी कहते है। वस्तुतः भाषा, उपभाषा और बोली में मूलतः अंतर क्षेत्र-विस्तार का है।

जहां भाषा का क्षेत्र राज्य या राष्ट्र के स्तर पर होता है वहीं उपभाषा का क्षेत्रीय विस्तार प्रांतीय व बोली का मण्डलस्तरीय होता है। इसीलिए यह कहा जाता है कि एकाधिक उपभाषाएँ मिलकर भाषा का निर्माण करतीं हैं तो एकाधिक बोलियाँ मिलकर उपभाषा का निर्माण करते हैं।

इसीलिए उपभाषा को ‘विभाषा’ या ‘बोली-वर्ग’ भी कहा जाता है।

अपभ्रंश क्या है?

अपभ्रंश, हिन्दी की भाँति ही एक भाषा या भाषिक अवस्था है। बस अंतर इस बात का है कि जहां हिन्दी का विकास आधुनिक आर्यभाषा के रूप में हुआ है। वहीं अपभ्रंश का विकास मध्यकालीन आर्यभाषा के तौर पर हुआ है। इस रूप में अपभ्रंश, हिन्दी की पूर्ववर्ती भाषा है, जिसका विकास 500-1000 ईस्वी के मध्य माना जाता है।

अपभ्रंश के 500 वर्ष विस्तार के पहले 250 वर्ष को पूर्ववर्ती अपभ्रंश (जिस पर प्राकृत का प्रभाव अधिक माना जाता है) तो बाद वाले 250 वर्ष (अर्थात् 750-1000 ईस्वी) को परवर्ती अपभ्रंश या अवहठ्ठ (अपभ्रंश का वह हिस्सा जो हिन्दी के अधिक निकट माना जाता है) भी कहा जाता है।

इस पोस्ट में हम अपभ्रंश से विकसित हिन्दी की अलग-अलग उपभाषा और उन अलग-अलग उपभाषाओं से विकसित अलग-अलग बोलियों के विकास की चर्चा करेंगें, जो कि निम्न है-

हिन्दी की प्रमुख उपभाषाएँ, बोलियाँ एवं उनके अपभ्रंश

अपभ्रंशउपभाषाबोलियाँ
शौरसेनीपश्चिमी हिन्दीब्रजभाषा, खड़ी बोली, कन्नौजी, बुंदेली, हरियाणवी/बाँगरू
शौरसेनीराजस्थानी हिन्दीजयपुरी/ढूँढाणी- पूर्वी राजस्थानी
मारवाड़ी- पश्चिमी राजस्थानी
मेवाती- उत्तरी राजस्थानी
मालवी- दक्षिणी राजस्थानी
शौरसेनीपहाड़ी हिन्दीकुमाऊँनी, गढ़वाली
अर्धमागधीपूर्वी हिन्दीअवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी
मागधीबिहारी हिन्दीमैथिली, मगही, भोजपुरी

हिन्दी की प्रमुख बोलियों के नामकरण एवं नामकरणकर्ता

हिन्दी की बोलियाँ बोलियों के नामकरणकर्ता
डिंगलबाँकीदास
बिहारी हिन्दीग्रियर्सन
राजस्थानी हिन्दीग्रियर्सन
कौरवीराहुल सांकृत्यायन
ब्रजबुलिईश्वरचन्द्र गुप्त
मैथिलीकोलब्रुक
भोजपुरीरेमण्ड

हिन्दी के बोलियों का उच्चारण

हिन्दी की बोलियाँ उच्चारण विशिष्टता
खड़ी बोली/कौरवी, हरियाणवी/बाँगरू, दक्खिनीआकार बहुला
ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली, मारवाड़ी, कुमाऊँनी, गढ़वाली, मालवीओकार बहुला
भोजपुरीइकार बहुला
अवधी, बघेलीउदासीन आकार बहुला

बोली किसे कहते हैं?

भाषा-विज्ञान के क्षेत्र में बोली से तात्पर्य क्षेत्र विशेष (यानी मण्डल स्तर पर) में बोले जाने वाली वह भाषिक रूप है जिसमें कुछ साहित्यिक कार्य भी उपलब्ध हों। अंग्रेजी में बोली के लिए Sub-Dialect शब्द प्रचलित है।

बोली क्या है?

बहुत सी मिलती-जुलती उपबोलियों का सामूहिक रूप बोली है।

उपभाषा क्या है?

एक से अधिक बोलियों का समूह उपभाषा है। इसे बोली-वर्ग या विभाषा भी कहते हैं।

विभाषा किसे कहते हैं?

उपभाषा को।

अपभ्रंश किसे कहते हैं?

हिन्दी की पूर्ववर्ती मध्यकालीन आर्यभाषा को।

अपभ्रंश का समय क्या है?

500-1000 ईस्वी

हिन्दी का समय क्या है?

1000 ईस्वी से अब तक

अवहठ्ठ किसे कहते हैं?

परवर्ती अपभ्रंश को जिसका समय 750-1000 ईस्वी लगभग माना जाता है।

हिन्दी में कितनी उपभाषाएँ हैं?

5

हिन्दी की कितनी बोलियाँ हैं

मुख्यतः 19

पश्चिमी हिन्दी की कौन सी बोलियाँ हैं?

ब्रजभाषा, खड़ी बोली, कन्नौजी, बुंदेली, हरियाणवी/बाँगरू

खड़ी बोली और ब्रजभाषा का विकास किससे हुआ है?

शौरसेनी अपभ्रंश और पश्चिमी हिन्दी से

अवधी का विकास किससे हुआ है?

अर्धमागधी अपभ्रंश या पूर्वी हिन्दी से

भोजपुरी का विकास किससे हुआ है?

मागधी अपभ्रंश या बिहारी हिन्दी से

मैथिली नाम किसने दिया है?

कोलब्रुक

भोजपुरी नाम किसने दिया है?

रेमण्ड

खड़ी बोली कैसी बोली है?

आकार बहुला

अवधी कैसी बोली है?

उदासीन आकार बहुला

भोजपुरी कैसी बोली है?

इकार बहुला

ब्रजभाषा कैसी बोली है?

ओकार बहुला

ब्रजबुलि नाम किसने दिया है?

ईश्वरचन्द्र गुप्त

डिंगल नाम किसने दिया है?

बाँकीदास

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