Dashkumarchritm Mahakavya – दशकुमारचरितम् एक दृष्टि में –

Dashkumarchritm Mahakavya – दशकुमारचरितम् एक दृष्टि में

यह एक सुंदर गद्य काव्य है। इसकी भाषा में ललित, मधुर तथा श्लेषादि अलंकारों के आने पर भी इसकी सरसता ज्यों की त्यों बनी हुई है। इस तरह यह गद्य काव्य महत्वपूर्ण तथ्यों के कारण परीक्षा के दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है –

रचनाकार आचार्य दण्डी
पिता वीरदत्त
मातागौरी
समय600 ई. के आस-पास
मुख्य रचनाएंहर्षचरित, अवन्तिसुन्दरी कथा
उपजीव्य गुणाढय कृत बृहत्कथा का प्रभाव दिखाई पड़ता है।
काव्य के स्वरूपइसमें कथा और आख्यायिका दोनों के लक्षण दिखाई पड़ते हैं।
शैली एवं गुण वैदर्भी शैली। प्रसाद एवं माधुर्य गुण
प्रमुख वर्णनपुष्पपुर, इंद्रजाल, काममंजरी वृतांत, विदेह, कल्पसुंदरी,
विकटवर्मा वृतांत, श्रावस्ती, नवमल्लिका, कन्दुकवती वृतांत,
कलिंग देश कनकलेखा, मंजूवादिनी, आदि से सम्बद्ध वर्णन।

आचार्य दण्डी के पिता का क्या नाम है?

Ans. वीरदत्त है।

आचार्य दण्डी का समय क्या है?

Ans. 600 ई. के आस-पास।

आचार्य दण्डी की अन्य रचनाएं कौन-सी है?

Ans. हर्षचरित और अवन्तिसुंदरी कथा हैं।

आचार्य दण्डी की माता का क्या नाम है?

Ans. गौरी है।

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