Bhartiya Kavyshastra/ Sanskrit Kavyshastra भारतीय काव्यशास्त्र-संस्कृत काव्यशास्त्र के प्रमुख आचार्य, संप्रदाय एवं उनकी रचनाएँ

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काव्यशास्त्र अभ्यास प्रश्न

काव्यशास्त्र क्या है?

काव्यशास्त्र एक यौगिक शब्द है, जो काव्य+शास्त्र के योग से बना है। काव्य का अर्थ जहां कविता तो शास्त्र का तात्पर्य ज्ञान से है। इस प्रकार काव्यशास्त्र से अभिप्राय कविता संबंधी ज्ञान से है। दूसरे शब्दों में कहें तो काव्यशास्त्र कविता के लेखन एवं पठन-पाठन से संबंधित वह आवश्यक ज्ञान है जिसके माध्यम से कविता के तत्व (जैसे- रस, छंद, अलंकार आदि) उसके भेद-उपभेद के साथ ही विविध सैद्धांतिक पक्ष की विधिवत जानकारी होती है। इसीलिए काव्यशास्त्र का ज्ञान जहां अच्छी कविता लेखन के लिए कवि को होना आवश्यक माना गया है वहीं उसी कविता को अच्छी तरह से समझने के लिए पाठक को भी इस ज्ञान का ज़रूरी कहा गया है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण हिन्दी साहित्य का एक प्रमुख युग ‘रीतिकाल’ है जहां पर उत्कृष्ट काव्य लेखन हेतु निरन्तर काव्य-ज्ञान अर्जित करने वाले काव्य-अभ्यासी कवि मिलते हैं तो वहीं दरबार में काव्य रसिकों को पूर्णतः काव्यानंद प्राप्त कराने हेतु काव्य ज्ञान के तौर पर काव्य-लक्षण भी लिखे जा रहे थे।

काव्यशास्त्र के लिए काव्यालंकार, साहित्यशास्त्र, साहित्य मीमांसा, क्रियाकलाप, क्रियाकल्प विद्या, साहित्य विद्या जैसे शब्दों का प्रयोग होता रहा है।

हिन्दी काव्यशास्त्र का सीधा संबंध संस्कृत काव्यशास्त्र से है जिसका आरंभ दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी के मध्य आचार्य भरतमुनि से माना जाता है।

संस्कृत या भारतीय काव्यशास्त्र के आरंभकर्ता या आद्य आचार्य भारतमुनि माने जाते हैं। भरतमुनि ने ही सर्वप्रथम नाट्यशास्त्र नामक ग्रंथ लिखकर रस संप्रदाय की स्थापना करते हुए काव्यशस्त्रीय चिंतन को आरंभ किया था इसीलिए उन्हें भारतीय या संस्कृत काव्यशास्त्र का जनक भी कहा जाता है।

आज भारतीय या संस्कृत काव्यशास्त्र में कुल 6 संप्रदाय प्रचलित हैं। इन सभी संप्रदायों का विवरण निम्न है-

भारतीय काव्यशास्त्र- संस्कृत काव्यशास्त्र के संप्रदाय

भारतीय या संस्कृत काव्यशास्त्र के कुल 6 संप्रदाय प्रचलित हैं। इन 6 संप्रदायों का प्रवर्तन विभिन्न आचार्यों ने अलग-अलग समय में किया है जिसका संपूर्ण विवरण निम्न है-

काव्यशास्त्रीय संप्रदाय प्रवर्तक आचार्य आधार ग्रंथ समय
रस संप्रदायआचार्य भरतमुनिनाट्यशास्त्रदूसरी शता. ई. पू. से
दूसरी शता.
अलंकार संप्रदायआचार्य भामहकाव्यालंकारछठीं शता.
रीति संप्रदायआचार्य वामनकाव्यालंकार सूत्रवृत्तिआठवीं शता.
ध्वनि संप्रदायआचार्य आनंदवर्धनध्वन्यालोकनौवीं शता.
वक्रोक्ति संप्रदायआचार्य कुंतकवक्रोक्तिजीवितम्दसवीं शता.
औचित्य संप्रदायआचार्य क्षेमेन्द्रऔचित्यविचारचर्चाग्यारहवीं शता.

भारतीय काव्यशास्त्र-संस्कृत काव्यशास्त्र के प्रमुख आचार्य और उनकी रचनाएँ

भारतीय काव्यशास्त्र-संस्कृत काव्यशास्त्र के प्रमुख आचार्य और उनकी रचनाएँ निम्न हैं-

काव्यशास्त्रीय आचार्य समय प्रमुख ग्रंथ/रचनाएँ
आचार्य भरतमुनिदूसरी शता. ई. पू. से
दूसरी शता.
नाट्यशास्त्र
आचार्य भामहछठीं शता.काव्यालंकार
आचार्य दंडीसातवीं शता.काव्यादर्श
आचार्य वामनआठवीं शता.काव्यालंकार सूत्रवृत्ति
उद्भटआठवीं शता.काव्यालंकार सारसंग्रह
रुद्रटनौवीं शता.
(पूर्वार्ध)
काव्यालंकार
आचार्य आनंदवर्धननौवीं शता.
(उत्तरार्ध)
ध्वन्यालोक
राजशेखरदसवीं शता.
(880-920 ई.)
काव्यमीमांसा
मुकुलभट्टनौवीं-दसवीं शता.
भट्तौतदसवीं शता.काव्यकौतुभ
भट्टलोल्लटउद्भट और अभिनवगुप्त के मध्य
भट्टनायकदसवीं शता. मध्यहृदयदर्पण
अभिनवगुप्तदसवीं शता.
(उत्तरार्ध)
ध्वन्यालोकलोचन, अभिनवभारती, तंत्रालोक
कुंतकदसवीं शता.
(उत्तरार्ध)
वक्रोक्तिजीवितम्
धनंजयदसवीं शता.दशरूपक
सागरनन्दीग्यारहवीं शता.
महिमभट्टग्यारहवीं शता.
(मध्य)
व्यक्तिविवेक
भोजराजग्यारहवीं शता.
(उत्तरार्ध)
सरस्वती कंठाभरण,
श्रृंगार प्रकाश
क्षेमेन्द्रग्यारहवीं शता.
(उत्तरार्ध)
औचित्यविचारचर्चा
मम्मटग्यारहवीं शता.
(उत्तरार्ध)
काव्यप्रकाश
अग्निपुराणकारबारहवीं शता.
(निकट)
अग्निपुराण
शोभकर मित्रबारहवीं शता.अलंकार रत्नाकर
हेमचंद्रबारहवीं शता.काव्यानुशासन
रामचंद्र-गुणचंद्रबारहवीं शता.नाट्यदर्पण
रुय्यकबारहवीं शता. (मध्य)अलंकार सर्वस्व
वाग्भट्ट प्रथमबारहवीं शता. (उत्तरार्द्ध)वाग्भट्टालंकार
अमरचंदतेरहवीं शता.
जयदेवतेरहवीं शता.चंद्रालोक
शारदातनयतेरहवीं शता.भावप्रकाशन
वाग्भट्ट द्वितीयचौदहवीं शता.
भानुदत्तचौदहवीं शता.रसमंजरी, रसतरंगिणी
विद्यानाथचौदहवीं शता.प्रतापरुद्र यशोभूषण
आचार्य विश्वनाथचौदहवीं शता. (पूर्वार्द्ध)साहित्यदर्पण
विद्याधरचौदहवीं शता. (पूर्वार्द्ध)एकावली
रूपगोस्वामीपंद्रहवीं-सोलहवीं शता.उज्ज्वल नीलमणि
अप्पयदीक्षितसोलहवीं शता.कुवलयानंद, वृत्तिवार्तिक, चित्रमीमांसा
शेखरकेशव मिश्रसोलहवीं शता. (उत्तरार्द्ध)अलंकारशेखर
पंडितराज जगन्नाथसत्रहवीं शता.रसगंगाधर
विश्वेश्वर पंडितअठारहवीं शता.अलंकार कौस्तुभ

काव्यशास्त्र अभ्यास प्रश्न

भारतीय काव्यशास्त्र का संबंध मुख्यतः किस भाषा से है?

संस्कृत भाषा (संस्कृत काव्यशास्त्र को ही भारतीय काव्यशास्त्र कहते हैं।)

भारतीय काव्यशास्त्र का आरंभ कब से माना जाता है?

भारतीय काव्यशास्त्र का आरंभ दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी के मध्य माना जाता है।

भारतीय काव्यशास्त्र के जनक कौन माने जाते हैं?

भारतीय काव्यशास्त्र के जनक आचार्य भरतमुनि माने जाते हैं।

भारतीय काव्यशास्त्र के प्रथम आचार्य कौन हैं?

आचार्य भरतमुनि

भारतीय काव्यशास्त्र के अंतिम आचार्य कौन माने जाते हैं?

पंडितराज जगन्नाथ

रस संप्रदाय की स्थापना किस आचार्य ने की है?

आचार्य भरतमुनि

अलंकार संप्रदाय की स्थापना किस आचार्य ने की है?

आचार्य भामह

रीति संप्रदाय की स्थापना किस आचार्य ने की है?

आचार्य वामन

ध्वनि संप्रदाय की स्थापना किस आचार्य ने की है?

आचार्य आनंदवर्धन

वक्रोक्ति संप्रदाय की स्थापना किस आचार्य ने की है?

आचार्य कुंतक

औचित्य संप्रदाय की स्थापना किस आचार्य ने की है?

आचार्य क्षेमेन्द्र

नाट्यशास्त्र के लेखक कौन हैं?

आचार्य भरतमुनि

काव्यालंकार के लेखक कौन हैं?

आचार्य भामह

ध्वन्यालोक के लेखक कौन हैं?

आन्दवर्धन

काव्यादर्श के लेखक कौन हैं?

आचार्य दण्डी

काव्यप्रकाश के लेखक कौन हैं?

आचार्य मम्मट

साहित्यदर्पण के लेखक कौन हैं?

आचार्य विश्वनाथ

चंद्रालोक के लेखक कौन हैं?

जयदेव

रसगंगाधर के लेखक कौन हैं?

पंडितराज जगन्नाथ

पर्यायवाची शब्द

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