Andman and Nicobar Islands New Names 2023 – अंडमान द्वीपों के नये नाम

Andman and Nicobar Islands New Names 2023 – अंडमान द्वीपों के नये नाम बदलकर अब परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर होंगे। भारत सरकार ने अंडमान निकोबार के 21 द्वीपों के नाम बदलकर उन 21 शहीदों और परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखने का फैसला किया।

इन 21 द्वीप समूहों के नये नाम इस प्रकार होंगे –

Contents hide

आखिर अंडमान द्वीप समूह ही क्यों

क्योंकि अमंडमान द्वीप समूह का देश की आजादी में विशेष स्थान रहा है। यह 1857 के बाद देश की आजादी की जंग लड़ने वाले योद्धाओं को सेल्यूलर जेल में दी जाने वाली कठोर यातनाओं का गवाह रहा है । देश की स्वतंत्रता के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जो यातनाएं सहीं, वह अद्वितीय रहा है। यहाँ की भूमि ने इन यातनाओं को सहने वाले क्रांति के वीरों एवं योद्धाओं को एक माँ बनकर सांत्वना देने का काम किया है। ऐसा माना जाता है कि अंडमान निकोबार को ही सबसे पहले आजादी देखने का सम्मान मिला, 30 दिसम्बर, 1945 को यह आजाद हो गया था। कहा जाता है कि जेल आजादी के आंदोलन का एक तीर्थ है। इसलिए भी इसकी महत्ता बढ़ जाती है कि यह एक पर्यटन स्थल भी है, जहाँ हजारों सैलानी घूमने के लिए आते हैं ।

अंडमान द्वीप समूह के बदले हुए नाम और परमवीर चक्र विजेताओं का परिचय

(1) योगेंद्र द्वीप (Yogendra Island)

सूबेदार मेजर सेवानिवृत (माननीय कप्तान) ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव

“इनका जन्म 10 मई 1980, बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था । कंधे और गले में में तीन गोलियां लगने के बावजूद अपने पराक्रम और अद्भुत साहस क्षमता से कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल पर स्थित पहले बंकर में घुस गए और एक ग्रेनेड से चार पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया । इसके बाद उन्होंने दूसरे बंकर पर हमला किया और चार पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया । इससे प्लाटून को टाइगर हिल पर अपना कब्जा जमा लिया ।”

(2) सोमनाथ द्वीप (Somnath Island)

मेजर सोमनाथ शर्मा

“मेजर सोमनाथ शर्मा के नाम पर जिनका जन्म 31 जनवरी 1923, कांगड़ा (हिमाचल) में हुआ था । आप भारतीय सेना की कुमायूं रेजीमेंट में कंपनी कमांडर के रूप में 3 नवंबर 1947 को श्रीनगर एयरवेस पर कब्जा करने वाले पाकिस्तान ने 700 घुसपैठियों के साथ श्रीनगर पर हमला बोल दिया । 50 जवानों के साथ मिलकर मेजर सोमनाथ शर्मा ने अपने साथियों के शौर्य और पराक्रम से न सिर्फ उन्हें 6 घंटे तक रोका बल्कि 200 गुसपैठियों को मार गिराया। इस दौरान वे वीरगति को प्राप्त हुए । परमवीर चक्र पाने वाले वे भारत माता के पहले वीर सपूत हैं, जिनके नाम पर इस द्वीप का नाम रखा गया है ।”

(3) जदुनाथ द्वीप (Jadunath Island)

नायक जदुनाथ सिंह

“इनका जन्म 21 नवंबर 1916 को शाहजहाँ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था । जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर पर कब्जे के लिए 6 फ़रवरी 1948 की प्रातः पाकिस्तानी सेना ने हमला बोला था । उस वक्त जदुनाथ सिंह अपने 9 जवानों की टुकड़ी के साथ टेंढर चौकी पर डटे रहे और उन्होंने अपने नौ जवानों के साथ दुश्मनों के तीन प्रयासों को विफल किया । यह नौशेरा की लड़ाई के लिए एक महत्त्वपूर्ण क्षण साबित हुआ । नायक जदुनाथ सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया ।”

(4) पीरू सिंह शेखावत (Peeru Singh Sekhawat Island)

पीरू सिंह शेखावत

“जन्म- 20 मई 1918,झुनझुनु (राजस्थान) में । 6 राजपूताना राइफल में तैनाती के दौरान 18 जुलाई 1948 को उमेन टिथवाल दुश्मनों द्वारा अधिकृत पहाड़ी पर कर के उस पर कब्जा करने के काम सौंपा गया । युद्ध के दौरान उनकी टुकड़ी पर हमला हुआ और इस हमले में वे अकेले बच गए । पूरी तरह से जखमी होने पर भी उन्होंने ने दुश्मन सेना के ठिकाने को नष्ट कर दिया और उस पहाड़ी पर देश का झण्डा लहराने लगा ।”

(5) धनसिंह द्वीप (Dhan Singh Island)

लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह थापा

“इनका जन्म 10 अप्रैल 1928,शिमला (हिमाचल) में हुआ था । भारत-चीन युद्ध के समय 21 अक्टूबर 1962 को पेनगोंग झील के उत्तर में सिरिजैप और यूल पर कब्जा करने के लिए चीनी सैनिकों ने गुसपैठ शुरू किया था । गोरखा राइफल्स की प्रथम बटालियन द्वारा स्थापित एक पोस्ट की कमान संभालते हुए उन्होंने आक्रमणों को विफल किया । चीनी सैनिकों द्वारा उन्हें युद्ध में बंदी बना लिया गया था । 10 मई 1963 को उन्हें रिहा किया गया ।”

(6) शैतान सिंह द्वीप (Shaitan Singh Island)

मेजर शैतान सिंह

“जन्म 1 दिसंबर 1924, जोधपुर (राजस्थान) में । भारत-चीन युद्ध के दौरान 18 नवंबर 1962 को चीनी सेना ने चुशूल सेक्टर पर आक्रमण कर दिया । अपने जवानों के साथ वह आखिरी क्षण तक लड़ते रहे । युद्ध के बीच मेजर शैतान सिंह पाँच प्लाटून पोस्टों के बीच सामंजस्य तथा पुनर्गठन बनाकर लगातार जवानों का हौसला बढ़ाते रहे । वह एक पोस्ट से दूसरी पोस्ट तक बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जाते वक्त वीरगति को प्राप्त हुए ।”

(7) राणे द्वीप (Raane Island)

सेकेंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे

“इनका जन्म 26 जून 1918,हावेरी (कर्नाटक) में हुआ था । वर्ष 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के वक्त उन्होंने ने राजौरी क्षेत्र में की बाधाओं और खनन क्षेत्रों को साफ कर भारतीय सेनाओं को आगे बढ़ने के लिए रास्ता बनाया । युद्ध खेतर में उनकी बेहतरीन योजना और रणनीति के लिए उन्हें 8 अप्रैल 1948 को प्रमवेर चक्र से सम्मानित किया गया था । वर्ष 1968 में भारतीय से एक प्रमुख के रूप में सेवनिवृत हुए ।”

(8) करम सिंह द्वीप (Karam Singh Island)

कैप्टन एवं मानद कैप्टन करम सिंह

“इनका जन्म 15 सितंबर 1915,सेहना (पंजाब) में हुआ था । कश्मीर रियासत के लिए पाकिस्तान के पश्तून आदिवासी सैन्य टुकड़ियों ने सीमा पर स्थित टिथवाल सहित कई गांवों पर कब्जा कर लिया । 23 मई 1948 को भारतीय सेना पाकिस्तानी सैनिकों को से टिथवाल पर कब्जा वापस लिया । कई महीनों तक चली लड़ाई में उन्होंने अग्रिम टुकड़ी का नेतृत्व किया था । परमवीर चक्र प्राप्त करने वाली वह पहले जीवित भारतीय सैनिक थे ।”

(9) सलारिया द्वीप (Salariya Island)

कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया

“इनका जन्म 29 नवंबर 1935, शकरगढ़ में हुआ था । दिसंबर 1961 में कांगो गणराज्य में तैनात भारतीय सैनिकों में सलारिया भी शामिल थे । 5 दिसंबर को सलारिया की बटालियन ने पृथकवादियों के कारों पर हमला कर उन्हें नष्ट कर दिया । इस दौरान उन्होंने 40 लोगों को कुकरियों से हमले में मार गिराया और आपरेशन को सफल बनाया । हमले के दौरान उन्हें गोली लगी और वे वीरगति को प्राप्त हो गए ।”

(10) तारापोर द्वीप (Tarapor Island)

लेफ्टिनेंट कर्नल ए बी तारापोर

“इनका जन्म 18 अगस्त 1923,मुंबई में हुआ था । 11 सितंबर 1965 को पूना हार्स रेजीमेंट ने उन्हें चविंडह की लड़ाई के वक्त सियालकोट सेक्टर में फिलोरा और चविंडह के बीच वजीरवली से पाकिस्तान सेना ने भारी हमला किया । तारापोर ने लगातार दुश्मन टैंक और आर्टिलरी फायर के तहत फिलो पर हमला किया और 13 सितंबर को वजीरवली और 16 सितंबर 1965 को जसोरन पर कब्जा कर लिया ।”

(11) अलबर्ट एक्का द्वीप (Albart Ekka)

लांस लायक अलबर्ट एक्का

“इनका जन्म 27 दिसंबर 1942,गुमला (झारखंड) में हुआ था । भारत-पाकिस्तान का युद्ध 1971 में हिली की लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हो गए थे । उन्होंने सेना में बिहार रजीमेंट से अपना कार्य शुरू किया । अलबर्ट एक अच्छे योद्धा तो थे ही,यह हाकी के भी अच्छे खिलाड़ी थे । उन्होंने वीरता,शौर्य और सैनिक हुनर का प्रदर्शन करते हुए अपने इकाई के सैनिकों की रक्षा की थी ।”

(12) जोगिंदर द्वीप (Joginder Islands)

सूबेदार जोगिंदर सिंह

“इनका जन्म 26 सितंबर 1921,मोगा (पंजाब) में हुआ था । भारत चीन युद्ध के साथ वह नार्थ ईस्ट फ़्रंटियर एजेंसी में तान्पेंगला,ब्रूम ला मोर्चे पर टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे । 23 अक्टूबर को चीनी सेना ने असम राइफल्स की पोस्ट पर हमला बोला । अपनी पोस्ट को बचाने के लिए उन्होंने घायल होने तक युद्ध लड़ा और दुश्मनों को मार गिराया । चीनी सेना द्वारा आखिरकार बंदी बना लिए गए ।”

(13) होशियार द्वीप (Hoshiyaar Island)

मेजर होशियार सिंह

“इनका जन्म 5 मई 1935, सोनीपत (हरियाणा) में हुआ था । भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान तीसरे ग्रेनेडियर को 15-17 दिसंबर 1971 से शकरग़ढ़ से बसंतर नदी में एक पुल का निर्माण करने का कार्य दिया गया था । नदी दोनों तरफ से गहरी लैंड माइन से ढकी हुई थी । इस स्थिति में उन्होंने सभी हमलों को विफल कर दिया । गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद युद्ध विराम तक पीछे नहीं हटे ।”

(14) सेखों द्वीप (Sekhon Island)

फ्लाइंग आफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों

“इनका जन्म 17 जुलाई 1943, लुधियाना (पंजाब) में हुआ था । 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान वह भारतीय वायुसेना की ‘द फ्लाइंग बुलेट’ 18 वीं स्क्वाड्रन में काम कर रहे थे । 14 दिसंबर 1971 को श्रीनगर हवाई अड्डे पर पाकिस्तान वायु सेना के एफ-86 जेट विमानों द्वारा हमला किया । उन्होंने एक साथ दो सेबर जेट विमानों का सामना किया । इनमें से एक जहाज वही था, जिसने एयरफील्ड पर बम गिराया था । इस दौरान वह वीरगति के प्राप्त हुए ।”

(15) संजय द्वीप (Sanjay Island)

सूबेदार मेजर (तत्कालीन राइफलमैन) संजय कुमार

“इनका जन्म 3 मार्च 1976,कलोल बल्किन (हिमाचल) में हुआ था । कारगिल में वह मास्को वैली प्वाइंट 5875 टाप पर 11 साथियों के साथ तैनात थे । हमले में दो शहीद हो चुके थे और आठ साथी गंभीर रूप से घायल थे । खास रणनीति बनाकर उउन्होंने दुश्मनों को भागने पर मजबूर किया और दुश्मनों के यूनिर्वसल मशीनगन से उनका सफाया शुरू कर दिया । घायल होने के बावजूद वह तब तक डटे रहे,जब तक प्वाइंट फ्लैट टाप खाली नहीं हो गया ।”

(16) मनोज पांडे द्वीप (Manoj Pandey Island)

लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे

“इनका जन्म 25 जून 1975 सीतापुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था । पाकिस्तान के साथ कारगिल युद्ध के सबसे कठिन मोर्चों में से एक खालूबार पर विजय पाने के लिए उन्होंने 1/11 गोरखा राइफल्स अगुआई करते हुए दुश्मन से भिड़ गए और आखिरकार जीत कर ही माने । हालांकि युद्ध के दौरान 24 वर्ष की उम्र में वह देश के लिए बलिदान हो गए । वर्ष 2003 में उनके किरदार को फिल्म एलओसी में फिल्माया गया ।”

(17) खेत्रपाल द्वीप (Khetrapal Island)

सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल

“इनका जन्म अक्टूबर 1950 पुणे (महाराष्ट्र) में हुआ था । भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 17 पूना हार्स को भारतीय सेना के 47 वीं इंन्फेंट्री ब्रिगेड की कमान के अधीन सेवाएं देते हुए उन्हें युद्ध मैदान में भेजा गया था । संघर्ष की अवधि के दौरान 47 वीं ब्रिगेड शगरगढ़ सेक्टर में ही तैनात थी । छह माह के अल्प सैन्य जीवन की अवधि में ही उन्होंने देश के लिए बलिदान दिया । उनकी वीरता के लिए उन्हें परमवीर चक्र दिया गया ।”

(18) परमेश्वरन द्वीप (Parmeshwaran Island)

मेजर रामआस्वामी परमेश्वरन

“इनका जन्म 13 सितंबर 1946 मुंबई में हुआ था । 25 नवंबर 1987 को भारतीय शांति रक्षा सेना तहत तैनात मेजर रामास्वामी प्रमेश्वरवरन जब श्रीलंका में रात में देर से सर्च आपरेशन से लौट रहे थे,तो उनकी टुकड़ी पर आतंकवादियों के एक समूह ने हमला किया था । उन्होंने आतंकवादियों को पीछे से घेर लिया और हमला बोल दिया । आमने-सामने की लड़ाई के दौरान एक आतंकवादी ने उनकी सीने में गोली मार दी ।”

(19) बाना द्वीप (Bana Island)

नायक सूबेदार बाना सिंह

“इनका जन्म 6 जनवरी 1949 काद्याल, जम्मू-कश्मीर में हुआ था । सियाचिन ग्लेशियर को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त कराने के अभियान में उन्होंने जो शौर्य प्रदर्शन किया, वह आज तक याद किया जाता है । अलंकरण के समय वह नायब सूबेदार के पद पर थे, लेकिन बाद में वह सूबेदार, सूबेदार मेजर व कैप्टन बने । भारत की गणतंत्र दिवस परेड का नेतृत्व किया व भारत के राष्ट्रपति को सर्वप्रथम सलामी देने का अधिकार उन्हें ही मिला ।”

(20) बिक्रम बत्रा द्वीप (Bikram Batra Island)

कैप्टन बिक्रम बत्रा

“इनका जन्म 9 सितंबर 1974,पालमपुर (हिमाचल) कारगिल युद्ध के दौरान 20 जून 1999 को उन्होंने सबसे महत्त्वपूर्ण 5140 चोटी को पाक सेना से मुक्त करवाई थी और भारतीय झण्डा फहराया था । इसके बाद सेना ने चोटी 4875 को भी कब्जे में लेने का अभियान शुरू कर दिया । आमने-सामने की लड़ाई में पाँच दुश्मनों को मार गिराया । उन पर एलओसी और शेरशाह फिल्म बनी है ।”

(21) अब्दुल हमीद द्वीप (Abdul Hameed Island)

अब्दुल हमीद

“इनका जन्म 1 जुलाई 1933 गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था । भारत-पाक 1965 के युद्ध के दौरान पंजाब के तरनतारन जिले के खेमकरण सेक्टर में पाकस्तानी सेना “अमेरिकन पैटन टैंकों” के साथ आक्रमण कर रही थी । उन्होंने अपनी गनमाउटेड जीप में बैठ कर बंदूक से पैटन टैंकों के कमजोर हिस्से पर एकदम सटीक निशाना साधकर सात टैंक निस्तेनाबूत कर दिए । इससे पाकिस्तानी सेना में भगदड़ मच गई । घायल होने की वजह से वह वीरगति को प्राप्त हो गए ।”

नए द्वीपों के नामकरण का नक्शा

Image Credit – Dainik Jagran

अंडमान निकोबार के इन द्वीपों के नाम शहीदों के नाम पर रखने से देश के वीर जवानों को अपने आत्मगौरव की अनुभूति होगी साथ ही भारत के लोग भी इस पहल से शहीदों के प्रति सम्मान की दृष्टि रखेंगे।

Leave a Comment

error: Content is protected !!