Amrit ke pryaayvaachi अमृत के पर्यायवाची शब्द

एक समान अर्थ बताने वाले शब्दों को पर्यायवाची शब्द कहते हैं। आज हम Amrit ke pryaayvaachi – अमृत के पर्यायवाची शब्दों की बात यहाँ करेंगे।

परंतु उससे पहले हम आपको ‘अमृत’ के संबंध में एक रोचक घटना आप से साझा करेंगे । प्राचीन युग में समुद्र मंथन के समय, समुद्र से निकले अमृत को ‘अमृत’ कहा जाता है।

Smudr Mnthn Ki Katha समुद्र मंथन की कथा

समुद्र मंथन की, एक प्राचीन कथा है जिसमें ‘अमृत’ पाने के लिए देवताओं एवं दैत्यों में एक संग्राम हुआ। देवताओं एवं दैत्यों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया अर्थात् जैसे दही से लोनी निकालने के लिए उसमें मथनी को चलाया जाता है। कुछ उसी प्रकार का प्रयत्न देवताओं एवं दैत्यों के बीच समुद्र से उन तत्वों को निकलने के लिए किया गया जो समुद्र के गर्त में थे।

यदि हम इस कहानी के आरंभ में जाएं तो हम पाते हैं कि यह कहानी महर्षि दुर्वासा के शाप से शुरू होती है। महर्षि दुर्वासा अपने क्रोध के लिए जगत प्रसिद्ध थे लेकिन उनके क्रोध में भी संसार का कल्याण रहता था। एक बार इन्द्र के द्वारा उनको अपमानित किए जाने पर उन्होंने इन्द्र को शाप दिया कि तूने मेरे द्वारा दी गई इतनी सुंदर माला का कुछ भी सम्मान नहीं किया। इसलिए तेरे इस स्वर्ग का वैभव समाप्त हो जाएगा। इस श्राप के बाद इन्द्र सहित तीनों लोक में जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों ,वनस्पति के क्षीण होने से सबकुछ समाप्त होने लगा यज्ञ, तप आदि रुक गए एवं लोगों में दान-धर्म आदि रुचि कम होने लगी।

इसी मौके का फायद उठाकर दैत्यों ने स्वर्ग पर चढ़ाई कर दी। दोनों पक्षों के बीच युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में देवता पराजित हुए और दैत्यों का स्वर्ग लोक पर अधिकार हो गया। इस बात से भयभीत होकर देवताओं ने ब्रह्मा जी से गुहार लगाई। सारी बात सुनने के बाद ब्रह्मा जी ने इस समस्या के समाधान के लिए भगवान विष्णु जी की शरण में जाने के लिए कहा। भगवान विष्णु के धाम पहुंचकर देवताओं द्वारा इस समस्या के लिए गुहार लगाई, उनकी स्तुति एवं गुहार से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने पूरे प्रसंग को देवताओं से सुना फिर उन्होंने देवताओं से कहा मैं फिर से आपके तेज को बढ़ाऊँगा और स्वर्ग पर भी हमारा आधिपत्य होगा। पर मैं जो कुछ कहता हूँ, उसी तरह आप लोग करिए।

आप लोग दैत्यों के साथ मिलकर सम्पूर्ण औषधियों को लाकर क्षीर सागर में डालो एवं मंदराचल पर्वत को मथानी और नागों के राजा वासुकि को नेती (रस्सी) बनाकर उसे देवताओं एवं दैत्यों की सहायता से मथकर अमृत को निकालो। इस तरह से समुद्र मंथन से जो अमृत निकलेगा उसको पीकर आप लोग सबल और अमर हो जाओगे। भगवान विष्णु ने बड़ी ही चतुराई से नागराज वासुकि की पूंछ की ओर देवताओं को तथा जिस ओर नागराज वासुकि का मुँह था दैत्यों को नियुक्त किया। नागराज वासुकि के मुख से निकलने वाली श्वासाग्नि से दैत्य झुलस-झुलस कर निस्तेज हो गए। कहा जाता है कि भगवान विष्णु स्वयं कछुए का रूप धारण कर मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया था जिससे मथनी स्थिर रहे। भगवान विष्णु के इसी अवतार को ‘कुर्मावतार’ भी कहा जाता है। इसके बाद समुद्र मंथन से कई चीजें निकलीं। सबसे अंत में ‘देव धन्वतरि अपने हाथों में अमृत लेकर समुद्र से प्रकट हुए। अमरत्व देने के साथ-साथ अमृत में सभी तरह के रोग, कष्ट और शोक का नाश करने की क्षमता भी थी।

अमृत को लेकर दैत्यों ने धन्वतरि से छीना-झपटी करनी शुरू कर दी। तब फिर देवताओं के गुहार लगाने से भगवान विष्णु मोहिनी का रूप धारण करके दैत्यों के बीच में गए। ऐसे रूप लावण्य को देखकर सभी दैत्य भगवान विष्णु की माया से मोहित हो गए। तब मोहिनी बने भगवान विष्णु ने दैत्यों से कहा आप लोग व्यर्थ ही लड़ रहे हैं। मैं इस अमृत को देवताओं और दैत्यों में बराबर-बराबर बाँट देती हूँ। इस तरह उन्होंने दो लाइनें बनवाई प्रथम- दैत्यों की एवं द्वितीय- देवताओं की। छल से देवताओं को अमृत पिलाने लगी। मोहिनी के रूप-लावण्य में फंसे दैत्य इस छल को समझ नहीं सके। पर राहू नामक दैत्य इस चाल को समझ गया और अपने वेश को बदलकर देवताओं की लाइन में बैठ गया और अमृत पान कर लिया। कहते हैं कि यह अमृत उसके कंठ तक ही पहुँचा था कि देवताओं के कल्याण की भावना से प्रेरित होकर चंद्रमा और सूर्य ने उसके भेद को प्रकट कर दिया। भेद के प्रकट होते ही भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से राहू का सिर धड़ से अलग कर दिया पर अमृत का पान करने की वजह से राहू के जिस्म के दोनों भाग जीवित रह गए। इस तरह से सिर वाला हिस्सा राहू और धड़ वाला भाग केतु कहलाया। इस तरह से अमृत पान करने से देवताओं की शक्ति फिर से बढ़ गई। इसके बाद उन्होंने दैत्यों पर आक्रमण करके उन्हें पराजित किया और स्वर्ग का राज्य फिर से प्राप्त कर लिया।

‘अमृत’ के पर्यायवाची – Amrit ke pryaayvaachi

1.अमियAmiya
2.पीयूषPiyush
3.सोमSom
4.मधुMadhu
6.सुधाSudha
7.देवाहारDevaahaar
8.अमीAmee
9.जीवनोदकJivnodak
10.देवान्नDevaann
11.शुभाShubhaa
12.सुरभोगSurbhog
13.आबेहयातAabehayaat
14.अमृतAmrit

अंग्रेजी में अमृत (Nectar) के पर्यायवाची (Synonyms)

1.Beverage
2.Soda
3.Alcohol
4.Amrita
5.Honey
6.Intoxicant
7.Potable
8.Quencher
9.Spirits
10.Soft drink Mix
11.Liquor
12.Ambrosia
13.Libation
14.Brew
15.Pop

अमृत को अन्य भाषाओं में क्या कहते हैं

  1. अमृत को संस्कृत में सोमरस कहते हैं।
  2. अमृत को अंग्रेजी में ‘Nectar’ कहते हैं।

अमृत को अंग्रेजी में क्या कहते हैं?

Ans. अमृत को अंग्रेजी में ‘Nectar’ कहते हैं।

संस्कृत में अमृत को क्या कहते हैं?

Ans. संस्कृत में अमृत को सोमरस कहते हैं।

अमृत के कोई चार पर्यायवाची बताएं?

Ans. सुधा, सोम, पीयूष, अमिय आदि अमृत के पर्यायवाची हैं।

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